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भारत के भूतकाल को जो घर-घर तक पहुचाने का काम करेगा, वह प्रजा का महान कल्याणकर्ता होगा। --- ऋषि विवेकानंद भारत की जीवन शक्ति धर्म में निहित है, और जब तक हिंदु प्रजा अपने पूर्वजों की महान विरासत को नहीं भूलेगा,
तब तक पृथ्वी पर कोई भी ताकत उसका नाश नहीं कर सकता। वर्तमान समय में जो भी अपने भूतकाल की ओर देखते है,
लोग उसकी आलोचना करते हैं। ऐसा भी कहा जाता है, भारत के सारे दुःखों का कारण भूतकाल को स्मरण करना है। परन्तु,
मुझे तो इसके विपरीत बात सच लगती है। जब तक हिन्दू प्रजा अपने भूतकाल को भूल गए थे, तब तक वे मूर्छित अवस्था
में थे। परन्तु जैसे ही भूतकाल में दृष्टि दौड़ाना शुरू किया, उसी क्षण चारों ओर एक नयी जागृती दिखने लगी। सच
पूछा जाए तो इसी भूतकाल से भविष्य का निर्माण होने वाला है। ये भूतकाल ही भावी बन कर खड़ा होगा। इसलिए हिन्दू
प्रजा अपने भूतकाल का जितना अध्ययन करेगा, उतना ही उसका भविष्य उज्जवल होगा। और जो कोई भी इस भूतकाल के संदेश
तो घर-घर तक पहुँचाने का कार्य करेगा, वह प्रजा का महान कल्याणकर्ता होगा। The more, Therefore, the Hindus study the past, the more glorious will be their future, and whoever tries to bring the past to the door of everyone, is a great benefactor to his nation. o Rishi Vivekananda
मलेरिया की अक्सीर औषधिः (स्त्रोत --आरोग्य निधि पुस्तक के अंश -संत श्री आसाराम जी बापू आश्रम , अहमदाबाद ) मलेरिया का बुखार लोगों को अलग-अलग प्रकार से आता है। मुख्यरूप से उसका शरीर टूटता है, सिर दुःखता है, उल्टी होती है। कभी एकांतरा और कभी मौसमी रूप से भी मलेरिया का बुखार आता है और कई बार यह जानलेवा भी सिद्ध होता है। इसकी एक सरल, सस्ती तथा ऋषिपरम्परा से प्राप्त औषधि हैः हनुमानजी को जिसके पुष्प चढ़ते हैं उस आकड़े की ताजी, हरी डाली को नीचे झुकाकर (ताकि दूध नीचे न गिरे) उँगली जितनी मोटी दो डाली काट लें। फिर उन्हें धो लें। धोते वक्त कटे हिस्से को उँगली से दबाकर रखें ताकि डाली का दूध न गिरे। एक स्टील की तपेली में 400 ग्राम दूध (गाय का हो तो अधिक अच्छा) गर्म करने के लिए रखें। उस दूध को आकड़े की दोनों डण्डियों से हिलाते जायें। थोड़ी देर में दूध फट जायेगा। जब तक मावा न तैयार हो जाये तब तक उसे आकड़े की डण्डियों से हिलाते रहें। जब मावा तैयार हो जाये तब उसमें मावे से आधी मिश्री अथवा शक्कर डालकर (इलायची-बादाम भी डाल सकते हैं) ठण्डा होने पर एक ही बार में पूरा मावा मरीज को खिला दें। किन्तु बुखार हो तब नहीं, बुखार उतर जाने पर ही खिलायें। इस प्रयोग से मरीज को कभी दुबारा मलेरिया नहीं होगा। रक्त में मलेरिया की 'रींग्स' दिखेंगी तो भी बुखार नहीं आयेगा और मलेरिया के रोग से मरीज सदा के लिए मुक्त हो जायगा। 1 से 6 वर्ष के बालकों पर यह प्रयोग नहीं किया गया है। 6 से 12 वर्ष के बालकों के लिए दूध की मात्रा आधी अर्थात् 200 ग्राम लें और उपरोक्तानुसार मावा बनाकर खिलायें। अभी वर्त्तमान में जिसे मलेरिया का बुखार न आता हो वह भी यदि इस मावे का सेवन करे तो उसे भी भविष्य में कभी मलेरिया न होगा। दिमाग के जहरी मलेरिया में भी यह प्रयोग अकसीर इलाज का काम करता है। अतः यह प्रयोग सबके लिए करने जैसा है। अन्य सहायक प्रयोग मलेरियाः पहला प्रयोगः इन्द्रजौ, नागरमोथ, पित्तपापड़ा, कटुकी प्रत्येक का आधा से 1 ग्राम चूर्ण दिन में तीन बार खाने से मलेरिया में लाभ होता है। दूसरा प्रयोगः तुलसी के हरे पत्तों तथा काली मिर्च को बराबर मात्रा में लेकर, बारीक पीसकर गुंजा जितनी गोली बनाकर छाया में सुखावें। 2-2 गोली तीन-तीन घण्टे के अन्तर से पानी के साथ लेने से मलेरिया में लाभ होता है। तीसरा प्रयोगः नीम अथवा तुलसी का 20 से 50 मि.ली. काढ़ा या तुलसी का रस 10 ग्राम और अदरक का रस 5 ग्राम पीने से मलेरिया में लाभ होता है। चौथा प्रयोगः करेले के 1 तोला रस में 2 से 5 ग्राम जीरा डालकर पीने से अथवा रात्रि में पुराने गुड़ के साथ जीरा खिलाने से लाभ होता है। Events/Programs by M.V. I. V. V. University SRI GITA VISWASHANTI (WORLD PEACE) YAGNA ![]() Since 2008, Sri Gita ViswaShanti Yagna is organized by YOGA CHETANA SAMAJ in PATNA [Bihar]; A Unique way of spreading the message of Sri Krishna' s Gita on the auspicious GITA JAYANTI Day . Gita Jayanti is observed on the 11th day of the Shukla Paksha (waxing phase of moon) of Margashirsh month as per traditional Hindu calendar. It is believed that the Bhagavad Gita was rendered by Lord Krishna to Arjuna on this day. Gita Jayanthi falls on the Ekadashi day of the Margashirsha month (November – December). Programs organized during Gita Jayanti includes:-- > Mass Recitation of Gita, > Distribution of Gita, > Gita World Peace Rally YEAR -2008 YEAR- 2010 YEAR- 2011 To be held on 6th of December 2011 at Sarveshwar Kailash Shiv Mandir, Kaushalnagar, Anishabad, Patna, Bihar for detail information-- find a pdf file below in attachment. ORGANIZED BY:Yoga Chetana Samaj, and others
CONTACTS: National Secretary—CP baba [+91 9308 707 419]; International Secretary: Dr. Chakradhar [+91 9904 121 977] Email to: vedinformatics@gmail.com _____________________________________________________________ “I don’t wish to die in bed,
But with my boots on, Speaking of God and India” · Paramahansa Yogananda ![]() |







COVER PAGE : Ramayana in Human Physiology (book cover page) + 45 pages with global Vedic Hindu News and information on SPIRITUAL WORLD CONFERENCE {14th -16th March 2012; New Delhi} organized by Indian Foundation for Vedic science. send your comments to editor@vedinformatics.com.